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बिलासपुर

लिंगियाडीह में ‘इंसाफ’ का वनवास: 56 दिनों से जारी धरना, जनता ने सरकार से पूछा – “ कहाँ गया हमारा हक..? ”

“गार्डन में फूल खिलेंगे या गरीबों की बददुआएं—यह फैसला सरकार को करना होगा।” महेंद्र गंगोत्री

“यहां सिर्फ मकान नहीं टूट रहे, बल्कि आदिवासियों और सर्व समाज की पहचान पर हमला हो रहा है” : सुभाष परते

“सरकार अपनी विफलताओं का ठीकरा अब “चूहों” पर भी फोड़ रही है” : रंजीत सिंह

बिलासपुर। लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन ने आज 56 वें दिन में प्रवेश कर लिया है। कड़ाके की ठंड, लगातार संघर्ष और अनिश्चित भविष्य के बावजूद आंदोलनकारियों का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है। दो महीने से जारी इस धरने ने अब जन आंदोलन का रूप ले लिया है। आज धरना स्थल पर राजनीतिक, सामाजिक और आदिवासी संगठनों के बड़ी संख्या में नेताओं और नागरिकों की मौजूदगी ने आंदोलन को और मजबूती दी।

धरने में मौजूद लोगों ने सरकार से सवाल किया—“क्या वोट लेने के बाद जनता लावारिस हो जाती है?” लोगों का आरोप है कि वर्षों से बसे गरीब परिवारों को उजाड़कर अब वहां गार्डन और कॉम्प्लेक्स बनाने की साजिश रची जा रही है।

महेंद्र गंगोत्री जिलाध्यक्ष:जिला कांग्रेस कमेटी(ग्रामीण)


“गरीबों को बेघर करके होगा विकास?”


जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा,“क्या गरीबों को बेघर करके ही ‘विकास’ का जश्न मनाया जाएगा? गार्डन में फूल खिलेंगे या गरीबों की बददुआएं—यह फैसला सरकार को करना होगा।”
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सरकार को सत्ता में बैठाया, वही जनता उसे उखाड़ फेंकने की ताकत भी रखती है।


बेटी बचाओ’ के नारे पर सवाल


धरना स्थल पर मौजूद मातृशक्ति ने सरकार की नीतियों पर नाराजगी जताई। महिलाओं ने कहा कि एक तरफ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों बेटियां और महिलाएं अपने घर बचाने के लिए सड़कों पर रात गुजारने को मजबूर हैं।

सुभाष परते ( प्रदेश अध्यक्ष सर्व युवा आदिवासी समाज)


“यह सिर्फ घर नहीं, अस्मिता की लड़ाई है”

सर्व आदिवासी प्रदेश युवा वर्ग अध्यक्ष सुभाष सिंह परतें ने इसे अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए कहा कि यहां सिर्फ मकान नहीं टूट रहे, बल्कि आदिवासियों और सर्व समाज की पहचान पर हमला हो रहा है। उन्होंने सभी वर्गों से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की।


बदले की राजनीति का आरोप प्रदेश सचिव अशोक राजवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षद होने के कारण लिंगियाडीह में द्वेषपूर्ण कार्रवाई की जा रही है।

रंजीत सिंह (जिलाध्यक्ष NSUI)


NSUI अध्यक्ष रंजीत सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार अपनी विफलताओं का ठीकरा अब “चूहों” पर भी फोड़ रही है। मुंगेली जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मीकांत भास्कर ने सवाल उठाया कि गरीबों को उजाड़कर बनाए जाने वाले गार्डन का लाभ आखिर किसे मिलेगा? क्या वहां आम गरीब घूम पाएगा या यह सिर्फ सत्ताधीशों के लिए होगा?

सर्वदलीय समर्थन से मजबूत हुआ आंदोलन


धरने में श्याम मूरत कौशिक, आयुष राज, मनीष मरावी, गोपाल दुबे, अभिलाष रजक, भावेंद्र गंगोत्री, अन्नपूर्णा ध्रुव, राजेश ध्रुव, सुमन मरकाम, सोहराब खान, भूपेंद्र साहू, टिशू दुबे, शुभम सोनी, अविनाश ध्रुव, अभिषेक प्रधान, अमित देवांगन, सूरज नेताम, सूरज श्रीवास्तव और हेमराज दुबे सहित कई नेताओं ने संबोधन दिया।


मातृशक्ति की ऐतिहासिक भागीदारी


धरना स्थल पर सैकड़ों महिलाओं की मौजूदगी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बनी। रामबाई, राधा साहू, कुंती प्रजापति, चमेली रजक, जानकी गोड, फुलबाई साहू, पिंकी देवांगन, अनिता पाटील, उर्मिला पाटिल, लीला पाटिल, रूपा सरकार, सरस्वती देवांगन, पुष्पा देवांगन, लता देवांगन, राजकुमारी देवांगन, मथुरा सूर्यवंशी, जमुना सूर्यवंशी, सनी अहिरवार, चंद्रमा अहिरवार सहित बड़ी संख्या में महिलाएं धरने में डटी रहीं।


“लड़ाई जारी रहेगी”


आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक धरना जारी रहेगा।
लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन अब केवल विरोध नहीं, बल्कि जनता के अधिकार और सम्मान की लड़ाई बन चुका है।