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बिलासपुर

•लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन का 83वां दिन: आशियाना बचाने धूल धूप में डटीं महिलाएं,   •जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल

बिलासपुर। लिंगियाडीह बचाओ धरना आंदोलन आज अपने 83वें दिन में प्रवेश कर गया है। धूप और धूल की मार झेल रहीं सैकड़ों गरीब महिलाएं रोज दोपहर से शाम तक धरना स्थल पर बैठकर अपने आशियाने को बचाने की मांग कर रही हैं। लंबे समय से जारी इस आंदोलन के बावजूद क्षेत्रीय विधायक और नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं होते देख आंदोलनकारियों में अब नाराजगी बढ़ती जा रही है।


धरना दे रही महिलाओं का कहना है कि विकास के नाम पर उन्हें बेघर किया जा रहा है। उनका सवाल है कि सिर्फ गार्डन बनाने के लिए गरीब मजदूर परिवारों के मकानों को तोड़ना कहा तक जायज है।


विभिन्न दलों और सामाजिक संगठनों का मिला समर्थन


धरना स्थल पर समाज के अलग-अलग वर्गों और कई राजनीतिक-सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दे चुके हैं। शुक्रवार को डौंडीलोहारा के पूर्व विधायक जनकराम ठाकुर, रायपुर से सीपीआई (एमएल) रेड स्टार के राज्य सचिव सौरा यादव, जाति उन्मूलन आंदोलन के क्रांतिकारी संयोजक डॉ. तुहीन सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता धरना स्थल पहुंचे और सभी ने महिलाओं की मांगों को जायज बताया।


समर्थन देने पहुंचे नेताओं ने कहा कि 83 दिनों तक धूप और धूल में बैठी महिलाओं की सुध न लेना नगर निगम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की गंभीर उदासीनता को दर्शाता है। उनका कहना था कि कोई भी विकास कार्य गरीबों को बेघर कर नहीं किया जाना चाहिए।


पूर्व मुख्यमंत्री सहित कई नेताओं ने जताया समर्थन


इससे पहले कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधायक अटल श्रीवास्तव, दिलीप लहरिया सहित प्रदेश और जिला स्तर के कई पदाधिकारी भी धरना स्थल पहुंचकर समर्थन जता चुके हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि वर्तमान सरकार गरीबों के साथ अन्याय कर रही है और नगर निगम सत्ता के इशारे पर कार्य कर रहा है।


धरना स्थल पर महिलाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित


83वें दिन के धरना आंदोलन में वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल, रघु साहू सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। सर्वदलीय महाधरना के रूप में चल रहे इस आंदोलन में विभिन्न समाजों और वर्गों की सहभागिता देखी जा रही है।

लिंगियाडीह की महिलाएं अपने आशियाने की रक्षा के लिए जिस दृढ़ता से डटी हुई हैं, वह शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस लंबे आंदोलन पर कब संज्ञान लेते हैं।