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बिलासपुर

UGC एक्ट बहाली के समर्थन में 27 फरवरी को ST, SC और OBC महा मोर्चा का विशाल धरना-प्रदर्शन

बिलासपुर । यूजीसी (UGC) एक्ट बहाली के समर्थन में आगामी 27 फरवरी 2026 को प्रदेश स्तरीय विशाल धरना-प्रदर्शन और रैली आयोजित की जाएगी। यह आंदोलन ST, SC और OBC महा मोर्चा के बैनर तले किया जा रहा है, जिसे सर्व आदिवासी समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों का समर्थन प्राप्त है।

सुभाष सिंह परते, प्रदेश अध्यक्ष, युवा प्रभाग (सर्व आदिवासी समाज) ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि यह प्रदर्शन 27 फरवरी ,सुबह 11 बजे शहर के आंबेडकर चौक से प्रारंभ होकर अग्रसेन चौक, पुराना बस स्टैंड, तेलीपारा, गोलबाजार, सदर बाजार, देवकीनंदन चौक और नेहरू चौक होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचेगा, जहां कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

यूजीसी (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम), 2026 क्या है?

15 जनवरी 2026 से प्रभावी यूजीसी (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम), 2026 एक सख्त कानून है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकना और SC/ST/OBC छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है। यह 2012 के पूर्ववर्ती नियमों का स्थान लेता है।

प्रमुख बिंदु:

जाति-आधारित भेदभाव पर रोक: छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार के जातीय भेदभाव और उत्पीड़न पर पूर्ण प्रतिबंध।

इक्विटी सेल और कमेटी अनिवार्य: सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘इक्विटी कमेटी’ और ‘इक्विटी सेल’ का गठन अनिवार्य।

24×7 हेल्पलाइन/पोर्टल: शिकायत दर्ज कराने के लिए चौबीसों घंटे हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था।

कठोर दंड प्रावधान: दोषी पाए जाने पर निलंबन, निष्कासन अथवा कानूनी कार्रवाई संभव।

सभी संस्थानों पर लागू: केंद्रीय, राज्य, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों सहित सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू।


प्रशासनिक जवाबदेही: नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संस्थान प्रमुख सीधे जिम्मेदार होंगे।

व्यापक जनसमर्थन


जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में सर्व आदिवासी समाज संगठन के साथ-साथ दलित और ओबीसी समाज के विभिन्न महा मोर्चा संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। आयोजकों का कहना है कि बड़े शिक्षण संस्थानों में ST, SC, OBC और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के साथ भेदभाव की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिन पर रोक लगाने के लिए यूजीसी नियमों का सख्ती से लागू होना आवश्यक है।

आयोजकों ने प्रदेश भर से हजारों की संख्या में लोगों की भागीदारी का दावा किया है और इसे सामाजिक न्याय व शैक्षणिक समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है।