SECL ने कुसमुंडा कोयला स्टॉक की भ्रामक खबरों का किया खंडन: पारदर्शी ऑडिट प्रक्रिया पर दिया जोर

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने कुसमुंडा क्षेत्र में कोयला स्टॉक की कमी को लेकर स्थानीय मीडिया में चल रही खबरों को पूरी तरह से निराधार और भ्रामक करार दिया है। कंपनी के जनसंपर्क विभाग ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि इन खबरों में इस्तेमाल किए गए तथ्य और दस्तावेज न केवल पुराने हैं, बल्कि प्रक्रियात्मक रूप से भी गलत हैं।
भ्रामक दावों का विश्लेषण
SECL के प्रतिनिधि के अनुसार, कोयले के स्टॉक से संबंधित जो खबरें प्रसारित की जा रही हैं, वे पुराने डेटा (जैसे मार्च 2025 और सितंबर 2025) पर आधारित हैं। विभिन्न आरटीआई (RTI) से प्राप्त अलग-अलग समय के दस्तावेज़ों को जोड़कर गलत निष्कर्ष निकाले गए हैं। कंपनी ने इसे मामले को अनावश्यक रूप से ‘सनसनीखेज’ बनाने का प्रयास बताया है।
कोयला स्टॉक की कड़ी निगरानी और ऑडिट प्रक्रिया
वक्तव्य में कोयला स्टॉक के सत्यापन की पारदर्शी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया गया कि SECL में स्टॉक की जांच तीन स्तरों पर होती है:
मासिक जांच: हर महीने स्टॉक का नियमित आकलन किया जाता है।
तिमाही सत्यापन: हर तीन महीने में डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन होता है।
वार्षिक ऑडिट (Third Party Audit): वार्षिक आधार पर कोयला स्टॉक का सत्यापन किसी बाहरी एजेंसी या दूसरी कंपनियों के अधिकारियों द्वारा किया जाता है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता
SECL प्रबंधन ने कहा कि कंपनी उत्पादन और उत्पादकता से जुड़े सभी कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी ने हितधारकों और जनता से आग्रह किया है कि वे इस प्रकार की अपुष्ट और प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण खबरों पर विश्वास न करें।
डॉ.सनीश चंद (जनसंपर्क अधिकारी एसीसीएल,बिलासपुर)