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बिलासपुर

लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन के 4 माह पूरे: समर्थन के बावजूद प्रशासन की अनदेखी, आंदोलन हुआ तेज

बिलासपुर। लिंगियाडीह में चल रहा लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन आज चार महीने पूरे कर चुका है। अपने आशियाने को बचाने के लिए यहां के 136 गरीब परिवारों की महिलाएं पिछले चार महीनों से धूल और धूप में लगातार धरने पर बैठी हुई हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई है।


आंदोलनकारियों का कहना है कि शहर विकास के नाम पर उनकी वर्षों पुरानी बस्तियों को तोड़ा जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है। उनका तर्क है कि अपोलो रोड की सड़कें पहले ही पर्याप्त चौड़ी हो चुकी हैं, इसके बावजूद वहां बसे लोगों को उजाड़कर बेघर करने की तैयारी की जा रही है।
धरने पर बैठी महिलाओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि बस्तियां हटाए जाने से न केवल उनका आशियाना छिन जाएगा, बल्कि उनकी रोजी-रोटी भी खत्म हो जाएगी। कई परिवार छोटे-छोटे दुकानों के जरिए अपना जीवनयापन करते हैं, वहीं कई महिलाएं सब्जी बेचकर परिवार चला रही हैं। ऐसे में बस्ती उजड़ने से उनके सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।


आंदोलन को अब तक कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिल चुका है। सभी ने आंदोलनकारियों की मांगों को जायज बताते हुए प्रशासन से सकारात्मक पहल की मांग की है। इसके बावजूद प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे आंदोलन लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है।

हाल ही में जनता कांग्रेस (जोगी) के अध्यक्ष अमित जोगी भी धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया। इस दौरान उन्होंने नगर निगम को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि लिंगियाडीह वासियों को स्थायी पट्टा नहीं दिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा तथा नेशनल हाईवे पर भी धरना दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

नारी शक्ति की बड़ी भागीदारी

गुरुवार को धरना स्थल पर नारी शक्ति टीम की अगुवाई में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। इनमें यशोदा पाटिल, रामबाई, राधा साहू, रामौतिन, सूरजबाई, कुमारी निषाद, संतोषी यादव, कुंती प्रजापति, चमेली रजक, जानकी गोड, फुलबाई साहू, पिंकी देवांगन, अनिता पाटिल, उर्मिला पाटिल, लीला पाटिल, रूपा सरकार, सरस्वती देवांगन, पुष्पा देवांगन, लता देवांगन, राजकुमारी देवांगन, मथुरा सूर्यवंशी, जमुना सूर्यवंशी, सनी अहिरवार, चंद्रमा अहिरवार, जयकुमार अहिरवार, पीहरिया केवट, सोनबाई, कुंडिया केवट, सोनिया केवट, नंदनी ध्रुव, पिंकी बाई चौहान, प्रमिला ध्रुव, रानी देवांगन, साधना यादव, चंद्रकली निषाद, सीता साहू, सुशीला साहू, सुवासिन साहू, कुमारी यादव, अमेरिका श्रीवास, नंदकुमारी देवांगन, अनीता ध्रुव, रूपा देवी, गायत्री देवांगन, सहोदर गोड, सीता केवट, जानकी देवांगन, सोनिया मानिकपुरी, कौशल्या मानिकपुरी, मालती मानिकपुरी, मरजीना बेगम, सरस्वती यादव, वंदना डे, खोलबहरीन यादव, अनूपा श्रीवास, सुशीला श्रीवास, रामबाई मानिकपुरी, दुर्गा श्रीवास, सावित्री यादव, सुखमति मानिकपुरी, मीरा, शिवकुमारी देवांगन, अर्पणा पटेल, हेमलता देवांगन, सरिता राजपूत, मालती यादव, संतोष सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।


धरना स्थल पर महिलाओं की यह एकजुटता आंदोलन को और मजबूती दे रही है, वहीं प्रशासन की चुप्पी के चलते आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र होने के संकेत मिल रहे हैं।