छत्तीसगढ़ की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय पहचान: डॉ. राम रतन श्रीवास बने भारत-नेपाल साहित्य महोत्सव के ब्रांड एम्बेसडर

गिरिडीह/झारखंड। छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच रही है। बिलासपुर के प्रख्यात साहित्यकार डॉ. राम रतन श्रीवास को “पशुपतिनाथ भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव” का ब्रांड एम्बेसडर मनोनीत किया गया है। यह घोषणा पार्श्व अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय चेरिटेबल ट्रस्ट, गिरिडीह (झारखंड) द्वारा की गई।
ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुरेश सिंह शौर्य ने पत्रांक PIUCT/2026/01 (दिनांक 30 जनवरी 2026) के माध्यम से इसकी आधिकारिक पुष्टि की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है। यह दायित्व पूरी तरह अवैतनिक रहेगा।
पिसौद गांव में जन्मे डॉ. श्रीवास ने वर्षों से शिक्षा, साहित्य, पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। भारतीय रेलवे में सेवाएं देते हुए उन्होंने हिंदी के प्रचार-प्रसार को भी नई दिशा दी।
डॉ. श्रीवास विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं—जीवनधारा नमामि गंगे अभियान,श्रीराम अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव, अयोध्या भारतोदय लेखक संघ, नई दिल्ली,नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव
महात्मा बुद्ध अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव, बोधगया
पाटलिपुत्र अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव, पटना,पशुपतिनाथ भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव, काठमांडू इसके अलावा वे कन्नौजिया श्रीवास समाज साहित्यिक मंच (छत्तीसगढ़) के सह-संस्थापक व अध्यक्ष तथा काव्य रसिक संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री भी हैं।
डॉ. श्रीवास को लेखन और साहित्य के क्षेत्र में कई बड़े सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें शामिल हैं—
लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (कृष्णायन),गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड,छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान,कबीर कोहिनूर सम्मान, कालिदास सम्मान आगे सम्मान से सम्मानित हो चुके है।
“पशुपतिनाथ भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव” का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, संस्कृति और साहित्यिक परंपराओं को सशक्त बनाना और भारत-नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना है।
इस सम्मान पर खुशी जताते हुए डॉ. श्रीवास ने कहा कि वे शिक्षा, साहित्य, पर्यावरण, जल संरक्षण, खेल और विज्ञान के क्षेत्र में जनजागरण के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे। उन्होंने ट्रस्ट का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जिम्मेदारी भारत-नेपाल के बीच सांस्कृतिक सामंजस्य को और मजबूत करेगी।
डॉ. राम रतन श्रीवास की यह उपलब्धि न सिर्फ बिलासपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की उनकी यात्रा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही है।