बिलासपुर
जब हर बात पर हाईकोर्ट को ही हस्तक्षेप करना पड़े, तो जिम्मेदार अफसर और विभाग किस लिए?

बिलासपुर। शहर और राज्य के हालात इस कदर बिगड़े हुए हैं कि अब चाहे सिम्स हॉस्पिटल का मामला हो, नेशनल हाइवे की लापरवाही हो, सड़कों पर मवेशियों का आतंक हो, या फिर सड़क जाम कर जन्मदिन मनाने या रिल बनाने की बात हो—हर मुद्दे पर हाईकोर्ट को खुद संज्ञान लेना पड़ रहा है।

(NH में गाड़ी रोककर रील बनाया)
गौर करने वाली बात यह है कि जो काम ज़मीनी स्तर पर जिम्मेदार अफसरों और विभागों को करना चाहिए, वह अब अदालत को करना पड़ रहा है। सवाल उठता है कि अगर हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान हाईकोर्ट को ही करना पड़े, तो इन अफसरों और विभागों की भूमिका क्या बची? क्या फिर जनता के टैक्स से इन बेअसर तंत्र को पाले रखने का कोई औचित्य है?

जनता अब यही पूछ रही है—”जब फैसले और कार्रवाई कोर्ट को ही करनी है, तो निकम्मे तंत्र को क्यों न बंद कर दिया जाए?”