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बिलासपुर

लिंगियाडीह आंदोलन का 75 वा दिन: प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल

बिलासपुर। शहर में प्रस्तावित विकास कार्यों के विरोध में प्रभावित परिवारों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। सैकड़ों की संख्या में लोग आंदोलन स्थल पर डटे हुए हैं और प्रशासन व सरकार पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं कि उनकी सुनवाई नहीं की जा रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह “विकास” उनके लिए विनाश साबित हो रहा है, क्योंकि इससे लगभग 500 लोगों के जीवन, आशियाने और आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।


आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन इतना संवेदनहीन हो चुका है कि उसे प्रभावित परिवारों की पीड़ा और भविष्य की चिंता दिखाई नहीं दे रही। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों के बीच यह आशंका भी जताई जा रही है कि इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे कहीं न कहीं बड़े स्तर पर जमीन से जुड़ा खेल तो नहीं चल रहा। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों में गहरा अविश्वास साफ दिखाई दे रहा है।


प्रदर्शन में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में शामिल हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया जाता, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका मुख्य मांग पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर है।


आंदोलन में प्रमुख रूप से रूपेश साहू, ओंकार साहू, गोपी देवांगन, गोलू देवांगन, सलीम मेमन, रामबाई, राधा साहू, कुमारी निषाद, संतोषी यादव, कुंती प्रजापति, चमेली रजक, जानकी गोड, पिंकी देवांगन, उर्मिला पाटिल, लीला पाटिल, रूपा सरकार, सरस्वती देवांगन, पुष्पा देवांगन, लता देवांगन, राजकुमारी देवांगन, मथुरा सूर्यवंशी, जमुना सूर्यवंशी, सनी अहिरवार, जयकुमार अहिरवार, सोनिया केवट, नंदनी ध्रुव, साधना यादव, सीता साहू, सुशीला साहू, अमेरिका श्रीवास, मालती मानिकपुरी, मरजीना बेगम, वंदना डे, सावित्री यादव, सरिता राजपूत सहित सैकड़ों लोग मौजूद हैं।


फिलहाल प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक रूप से गंभीर रूप ले चुका है।