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प्रेस कॉन्फ्रेंसबिलासपुर

दोनो राजनीतिक पार्टियों को ये भरोसा है कि हम किसी को भी चुनाव लड़ाएंगे लोग हमे ही वोट देकर जिताएगी, इस भरोसे को इस बार तोड़ना जरूरी है : सुदीप श्रीवास्तव

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पहले से ही बिलासपुर की एक अलग पहचान थी। सन 1857 में जब रायपुर कमिशनरी बनाई गई तब बिलासपुर को बिलोपित कर दिया गया था तब तात्कालिक वायसराय ने लंदन में जा कर कहा कि बिलासपुर में कमिश्नरी होनी चाहिए। और 1861 में अंग्रेजो ने अपनी गलती मानी और पुनः बिलासपुर को कमिशनरी बनाया गया। लेकिन आज छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद यहा की पहचान कही न कही खो गई है। उक्त बाते हमर राज पार्टी से बिलासपुर लोकसभा प्रत्याशी सुदीप श्रीवास्तव ने आज प्रेसवार्ता में कही।

उन्होंने बिलासपुर प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर बीजेपी और कांग्रेस पार्टीयो के ऊपर आरोप लगाते हुए कहा कि आज आईआईएम बना तो रायपुर,आईआईटी बना तो भिलाई, हाईकोर्ट तो यहा है पर लॉ यूनिवर्सिटी बनाते है रायपुर में। एनटीपीसी का धूल और कचरा हम खा रहे है। जिससे आज बिलासपुर शहर का 3 डिग्री तापमान बड़ गया है। उस एनटीपीसी के सीएसआर फंड के पैसे का ट्रिपल आईआईटी खुला तो रायपुर में। पिछले 24 सालो से कांग्रेस और बीजेपी सिर्फ रस्म अदायगी कर रहे है। इसके अलावा इनका कोई विरोध उन्होंने नहीं किया। सब गवाह है आपने रेलवे जोन लड़कर पाया, हाईकोर्ट लड़ कर पाया, आपने केंद्रीय विश्व विद्यालय लड़ कर पाया, आपने एयरपोर्ट लड़कर पाया।

उन्होंने कहा कि पिछले सरकार ने आधा दर्जन मंत्री एक ही जिले दुर्ग के बना देते है। लेकिन अब तो हद ही हो गई। दोनो राजनीतिक पार्टियों को बिलासपुर से लोकसभा चुनाव लडने लायक कोई चेहरा नही मिला। जो बिलासपुर की बातो को मजबूती से रख सके। की एक प्रत्याशी 150 किलो मीटर से आ रहा। जो 4 महीने पहले भिलाई के लोगो से वादा किया था की मै आपका यहा सेवा करूंगा। जो वादा 4 महीने में तोड़ कर यहां आ कर बोल रहा की मैं आपकी सेवा करूंगा। जो भिलाई की लीज की जमीन थी उसे फ्री होल्ड करने की बात वहा के लोगो से की थी पिछली कार्यकाल में वो उसे पूरा नही कर सके। इसलिए यहां भाग कर आ रहे है। दुर्ग सामान्य सीट था लड़ सकते थे नही लड़े?

उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी पर प्रहार करते हुए कहा की भाजपा के प्रत्याशी 5 साल विधायक थे उनके कार्यकाल में रेलवे लाइन का जो अलैनमेंट थे वो बदल दिया गया। जिस मुंगेली रेल लाइन के लिए हमने सायकल चला कर आंदोलन किया था वो आज तक नही बनी। और उनके विधायक रहते रेल लाइन का अलाउनमेंट बदल कर आज लोरमी शहर से 30 किमी दूर की जा रही है। जो मुंगेली और लोरमी के बीच से जा सकती थी । ये चूक हुए कारतूस है। इनमे कोई क्षमता भी नही है। जब हम बिना विधायक और सांसद हुए इतना सब कुछ किया तो ये विधायक और सांसद रहते हुए काम क्यों नही किए?

उन्होंने कहा कि इस बार के चुनाव में सविधान को बदलने पर काफी चर्चा हो रही है। सांसद में वन नेशन वन इलेक्शन होगा तो सविधान बदलेगी, कॉमन सिविल कोर्ट आयेगा तो सविधान बदलेगी। इतने महत्वपूर्ण मुद्दे आने वाले है। तो मैं पूछता हूं प्रदेश के बीजेपी एवम कांग्रेस मिलकर जो 22 प्रत्याशी है। इन मुद्दों पर सविधान पर बहस करने योग्य है ? मैं इसलिए यह कह रहा हूं की मैं एक वकील हूं 1947 की सविधान सभा में 70% वकील थे। जिसने बिलासपुर के छेदीलाल बैरेस्टर भी शामिल थे। आज इन दोनो पार्टियों को ये भरोसा है कि हम किसी को भी चुनाव लड़ाएंगे लोग हमे ही वोट देकर जिताएगी। इस भरोसे को इस बार तोड़ना जरूरी है। इसलिए आज मैं चुनाव लड़ रहा हूं। आप सबसे समर्थन मांग रहा हूं, अपनी तरफ से पूरी ईमानदारी से काम करूंगा यह भरोसा आप सभी को दिला रहा हूं।