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बिलासपुरस्वास्थ्य

स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के चलते पूरे शहर में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़, शहर के हर गली मोहल्ले में क्लीनिक खोलकर कर रहे है मासूम लोगों के जीवन से खिलवाड़   

बिलासपुर। स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता एवं जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते आज पूरे जिले में झोलाछाप डॉक्टरो की बाढ़ सी आ गई है।  शहर के स्लम एरिया में ये लोग अपना क्लिनिक खोलकर गरीब, अनपढ़ लोगों को बेवकूफ बनाकर उनके जीवन से बड़ा खिलवाड़ कर रहे है।

इन झोलाछाप डॉक्टरो में ज्यादातर कलकत्ता से BAMS अल्टरनेटिव मेडिसिन का कॉर्स कर क्लीनिक चला रहे है। जिनकी यहां पंजीयन तक नहीं है। वही कुछ डॉक्टर आयुर्वेदिक चिकित्सा की आड़ में एलोपैथिक इलाज कर रहे है। तो कुछ लोग किसी और के नाम पर क्लीनिक खोल कर खुद क्लीनिक चला रहे है।

ऐसे कई मामले सामने आए है ,जैसे कुड़ूदंड के डॉक्टर डॉ.जी आर साहू के पास BAMS की डिग्री है लेकिन वह एलोपैथिक ईलाज कर रहे है, कैमरे में वह अपने आप को जनरल फिजिशियन बता रहे है। वही क्लीनिक किसी और के नाम से है लेकिन डॉक्टर साहब खुद  हॉस्पिटल में बैठकर सारे बीमारियों का एलोपैथिक इलाज कर रहे है।

डॉ जी आर साहू,कुड़ूदंड

ऐसे ही शंकर नगर के डॉ पी.के विश्वास की क्लीनिक कुछ दिनों पूर्व कोटा में झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से 2 मासूमो की मौत होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इनके क्लीनिक को सील कर दिया था जो अब बिना अनुमति के पुनः क्लिनिक खोल कर चला रहे है।

डॉ पी.के विश्वास शंकर नगर,बिलासपुर

वैसे ही बोदरी के डॉ विधान चक्रवर्तीं का भी यही कहानी है जिनके क्लीनिक को स्वास्थ्य विभाग ने सिल किया था वह भी अब अपनी क्लीनिक बिना अनुमति के खोल कर चला रहे है।

डॉ विधान चक्रवर्ती,बोदरी

ग्राम दो मोहानी के डॉ मुकुल दास के क्लिनिक को भी स्वास्थ्य विभाग ने सील किया था यह भी बड़े मजे से अपनी क्लीनिक खोल कर पुनः इलाज शुरू कर दिया है।

डॉ मुकुल दास,दो मुहानी

देवरीखुर्द में जायसवाल क्लिनिक के संचालक डॉ संजीव जायसवाल का भी यही हाल है जो बिना पंजीयन के क्लिनिक संचालित कर रहे है वही एलोपैथिक इलाज की कोई डिग्री उनके पास नहीं है लेकिन वे अपनी क्लीनिक में मरीजों को बकायदा भर्ती कर उनका कई गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे है। वही अपने क्लीनिक के बगल में मेडिकल दुकान भी खुलवा रखा है।

डॉ संजीव जायसवाल,देवरीखुर्द

ये झोलाछाप डॉक्टर भोले भाले गरीब लोगों को अपने जाल में फसाने जानबूझकर अपनी फ्रीस बेहद कम रखते है ताकि गरीब तबके के लोग इनके पास ही आ कर अपना इलाज करवाए। गरीब लोग भी फीस कम होने एवं अज्ञानतावश इनके पास इलाज करवाने पहुंच जाते है। जिनका ये फायदा उठा कर बाद में इलाज के नाम पर ठगते है।

आज जिले के गांव गांव, मोहल्ले मोहल्ले में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ सी आ गई है, जो बड़ी बड़ी गंभीर बीमारियों का बिना रोक टोक बेधड़क इलाज कर लोगो के जान से बड़ा खिलवाड़ कर रहे है। वही जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता से इनके हौसले बुलंद है।

   जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग भी जब तक कोई बड़ी घटना घटित न हो, तक तक इनके ऊपर कोई बड़ी कार्यवाही नहीं करती। जिससे ये धड़ल्ले से बेखौफ होकर अपनी क्लीनिक संचालित कर रहे है।  

शासन प्रशासन अगर समय रहते इन पर कोई बड़ी कार्यवाही नहीं करती तो कोटा में हुई दो मासूम बच्चो की मौत जैसी घटना फिर दुबारा घटित हो तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी ।