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कांग्रेस नेता अंकित गौरहा की शिकायत पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन , जेडी को कलेक्टर ने जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने 3 दिनों का दिया अल्टीमेटम

बिलासपुर ।  शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में अनियमितता और कोटा विकासखंड में सामने आए करीब 30 लाख रुपये के ‘भृत्य घोटाले’ ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा की शिकायत के बाद कलेक्टर ने संयुक्त संचालक (जेडी) शिक्षा को स्मरण-पत्र जारी कर तीन दिनों के भीतर जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव के प्रकरण में अंतिम जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अल्टीमेटम दिया है।


शिकायत के बाद कलेक्टर की सीधी दखल

शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहे कथित भ्रष्टाचार और आंतरिक घमासान ने अब गंभीर रूप ले लिया है। दस्तावेजों के साथ की गई शिकायत के आधार पर कलेक्टर ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए संयुक्त संचालक से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है।


नियम दरकिनार,नजराने से पोस्टिंग का आरोप

शिकायत में आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने कलेक्टर और जिला स्तरीय समिति को दरकिनार कर शिक्षकों की पदस्थापना मनमाने ढंग से की। युक्तियुक्तकरण संशोधन के नाम पर नियमों की अनदेखी कर ‘सेटिंग’ के जरिए लाभकारी स्थानों पर पोस्टिंग की गई।
200 प्रकरणों में संशोधन,प्रक्रिया पर सवाल
जानकारी के अनुसार लगभग 200 मामलों में बिना सक्षम अनुमति के संशोधन कर दिए गए। फाइलों में न तो वैध नोटशीट है और न ही अधिकारियों के हस्ताक्षर। कई मामलों में शिक्षकों को मौखिक निर्देश देकर कार्यभार ग्रहण कराया गया,जिससे प्रक्रिया को औपचारिक जांच से बचाया जा सके।

प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव की भूमिका संदिग्ध

इस पूरे मामले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और सुनील यादव की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर चहेते लोगों को लाभ पहुंचाया गया और पूरी प्रक्रिया को पर्दे के पीछे संचालित किया गया।

डीपीआई में उपसंचालक अशोक नारायण बंजारा कनेक्शन पर उठे सवाल

सूत्रों के मुताबिक रायपुर स्थित डीपीआई में पदस्थ अधिकारी अशोक नारायण बंजारा द्वारा संरक्षण दिए जाने की बात सामने आ रही है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि जांच रिपोर्टों को प्रभावित कर जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश इनके द्वारा की जा रही है।


TL आदेश: तीन दिन में रिपोर्ट अनिवार्य


कलेक्टर कार्यालय ने TL नंबर 19185/25-03-2026 के तहत संयुक्त संचालक को निर्देशित किया है कि तीन दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। साथ ही यह स्पष्ट जवाब मांगा गया है कि बिना कलेक्टर की अनुमति संशोधन आदेश कैसे जारी हुए और क्या इनमें आर्थिक लेन-देन शामिल है।


30 लाख का ‘भृत्य घोटाला’ भी जांच के घेरे में


कोटा विकासखंड में सामने आए इस मामले में एक भृत्य के खाते में ‘वर्दी धुलाई’ व अन्य मदों के नाम पर करीब 29.64 लाख रुपये का भुगतान किया गया। सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच हर महीने 4 लाख रुपये से अधिक की राशि मिलना सामान्य प्रक्रिया से परे माना जा रहा है।

निलंबन के बाद भी बड़े चेहरे सुरक्षित.?

मामले में संबंधित क्लर्क और भृत्य को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन मुख्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। साथ ही जिला कोषालय के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।

पुराने मामलों में भी बचते रहे जिम्मेदार

इससे पहले भी सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी राजेश कुमार प्रताप बाली पर गबन के आरोप सामने आए थे,लेकिन उस मामले में भी उच्च स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई थी।

स्मरण-पत्र से सख्ती

कलेक्टर द्वारा जारी स्मरण-पत्र ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि अब जांच में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि आरोपों की पुष्टि होती है,तो शिक्षा विभाग में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना है।

देखिए कलेक्टर का स्मरण पत्र….