रेल हादसे पर आम आदमी पार्टी का हमला — प्रियंका शुक्ला ने उठाए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर सवाल

बिलासपुर। 4 नवंबर को हुई दर्दनाक रेल दुर्घटना को लेकर आम आदमी पार्टी की छत्तीसगढ़ प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका शुक्ला ने रेलवे प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उन्होंने बिलासपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि यह हादसा केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता और कुप्रबंधन का नतीजा है।
प्रियंका शुक्ला ने कहा कि आंकड़ों के अनुसार इस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में 11 लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक यात्री घायल हुए हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद स्थल पर अफरातफरी का माहौल था — लोग खुद ही एक-दूसरे की मदद करने को मजबूर थे क्योंकि प्रशासनिक सहायता न के बराबर थी।
उन्होंने अस्पतालों की स्थिति पर भी नाराजगी जताई और कहा —
“जब घायलों को देखने हॉस्पिटल पहुंची, तो पाया कि मरीजों को न उचित इलाज मिल रहा था, न कोई मार्गदर्शन। डॉक्टर केवल मरीजों को रायपुर रिफर करने में लगे थे। किसी में भी संवेदनशीलता नहीं दिखी। कई परिवार डर के कारण निजी अस्पतालों में जाने से हिचकिचा रहे थे, क्योंकि उन्हें खर्च का डर सता रहा था।”
प्रियंका शुक्ला ने रेलवे प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने घटना की जिम्मेदारी केवल ट्रेन ड्राइवर पर थोप दी, जबकि वह तो देश सेवा में अपनी जान गंवा चुका है। उन्होंने सवाल उठाया —
“यह मामला पूरी तरह तकनीकी है — सिग्नल विभाग क्या कर रहा था? रेल मंत्री कहां हैं? क्या अब तक रेल मंत्रालय की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई?”
उन्होंने कहा कि यह “डबल इंजन सरकार” का राज है, जो “सुरक्षा कवच” का दावा करती है, लेकिन उसी बिलासपुर ज़ोन में यह हादसा हो गया जहां से रेलवे को सर्वाधिक राजस्व मिलता है।
प्रियंका ने जनप्रतिनिधियों के रवैये पर भी तीखा प्रहार करते हुए कहा —
“जनप्रतिनिधि घायल मरीजों के साथ केवल फोटो खिंचवाने में व्यस्त थे। किसी ने यह तक नहीं पूछा कि मरीजों को दवा या सहायता मिल रही है या नहीं। नगर विधायक तो हादसे के तीन दिन बाद अस्पताल पहुंचे।”
उन्होंने कहा कि कोरबा, जांजगीर, बिलासपुर और रायगढ़ के लोग इस ट्रेन में सवार थे, लेकिन उन क्षेत्रों के विधायक कहीं नजर नहीं आए।
मुआवजे के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि रेलवे ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है, जो नाकाफी है।
“मृतक की उम्र और पारिवारिक स्थिति के आधार पर मुआवजा तय होना चाहिए। अनाथ बच्चों का क्या होगा? सड़क हादसों में जहां 50 लाख तक मुआवजा दिया जा रहा है, वहीं रेल हादसे में सिर्फ 10 लाख क्यों?”
उन्होंने मांग की कि केंद्र और राज्य सरकारें इस हादसे की उच्च स्तरीय जांच कराएं, दोषियों पर कार्रवाई हो और मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा मिले।