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सिम्स में “विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस” के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम,”आत्महत्या समाज के लिए अभिशाप”: अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) के सभागार में मंगलवार को मनोरोग विभाग द्वारा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य की महत्ता पर जोर देते हुए आत्महत्या जैसी सामाजिक बुराई को रोकने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, डॉ. मधुमित्ता मूर्ति (विभागाध्यक्ष, निश्चेतना), डॉ. राकेश नहारेल (विभागाध्यक्ष, शिशु रोग), डॉ. चन्द्रहास ध्रुव (अधीक्षक, बालक छात्रावास) और डॉ. ज्योति पोर्ते (अधीक्षक, बालिका छात्रावास) कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम “आत्महत्या पर वर्णन को बदलना है” निर्धारित की है। इसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए सिम्स के विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य और जीवन प्रबंधन पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की प्रस्तावना मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुजीत नायक ने दी। इसके बाद डॉ. गौरी शंकर सिंह और डॉ. राकेश जांगड़े ने Suicide Prevention and Management विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

अपने संबोधन में अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने आत्महत्या को समाज के लिए अभिशाप बताते हुए इसके कारणों और बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बच्चों की सफलता का आकलन केवल परीक्षा के अंकों से नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान और वास्तविक जीवन में उसके प्रयोग से होना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को आत्महत्या न करने और इसके रोकथाम के लिए सक्रिय प्रयास करने की शपथ भी दिलाई।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने हर परिस्थिति में धैर्य एवं संयम बनाए रखने और आत्मबल को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण बताते हुए इस पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान मनोरोग विभाग के स्नातकोत्तर चिकित्सकों ने एक लघु नाट्य प्रस्तुत किया, जिसमें आत्महत्या के दुष्परिणाम और जीवन की कठिनाइयों से लड़ने के सकारात्मक संदेश को दर्शाया गया। इसी क्रम में बिलासा नर्सिंग महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी नाट्य मंचन कर आत्महत्या रोकथाम का संदेश दिया। दोनों प्रस्तुतियों ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया और उन्हें आत्महत्या के प्रति सोच बदलने के लिए प्रेरित किया।

अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. सुजीत नायक ने सभी अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ. सुधांशु भट्ट ने किया।

इस आयोजन को सफल बनाने में मनोरोग विभाग के डॉ. अंकित गुप्ता, डॉ. अंशुल गुप्ता, डॉ. प्रियांश, डॉ. अंकिता, डॉ. सत्यस्मिता, डॉ. तुलेश्वर, डॉ. आयुष, डॉ. अलीश, डॉ. किशन सहित सभी इंटर्न विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सिम्स का यह आयोजन न केवल चिकित्सा क्षेत्र के विद्यार्थियों बल्कि आम नागरिकों के लिए भी जागरूकता का माध्यम बना। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना ही आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।