नर्सिंग ऑफिसर ने पीएम मोदी को लिखा भावुक पत्र, बोलीं– ‘स्पाउजर ट्रांसफर पॉलिसी लागू कर रचें इतिहास’

नई दिल्ली/बनारस। देशभर के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दे रहे नर्सिंग स्टाफ़ अपनी निजी परेशानियों से जूझ रहे हैं। इन संस्थानों में कार्यरत अधिकतर नर्सिंग अधिकारियों को पारिवारिक जीवन और नौकरी के बीच संतुलन बनाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसी पीड़ा को सामने रखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और बीएचयू जैसे संस्थानों में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है।

बीएचयू की एक महिला नर्सिंग ऑफिसर ने प्रधानमंत्री को एक भावुक पत्र लिखकर स्पाउजर ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि पति–पत्नी दोनों ही हेल्थकेयर प्रोफेशनल होने के बावजूद एक-दूसरे से 850 किलोमीटर दूर तैनात हैं। परिवार से दूर रहने की मजबूरी के कारण बच्चों का पालन-पोषण और घर की जिम्मेदारियों का बोझ भारी हो गया है। “बच्चे रोते हैं, घर सूना रहता है। क्या हमारी देश सेवा का यही इनाम है?” — नर्सिंग ऑफिसर ने सवाल उठाया है।

नर्सिंग ऑफिसर ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि जिस तरह केंद्र सरकार ने किसानों और गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं, उसी तरह अब स्वास्थ्यकर्मियों के टूटे हुए परिवारों को भी जोड़ा जाए। उन्होंने लिखा है—
“कृपया सभी संस्थानों में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए ‘जीवनसाथी आधारित स्थानांतरण नीति’ लागू करें। यह नीति परिवारों को जोड़ेगी, बच्चों को मां–बाप का प्यार मिलेगा और हमें कर्तव्य निभाने की और अधिक ताकत मिलेगी। गरीबों और किसानों के बाद अब यदि आपने सफेद कोटधारियों के बिखरे परिवारों को जोड़ा, तो यह एक ऐसा कदम होगा जिसे पीढ़ियों तक याद किया जाएगा।”
यह पत्र सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। कई नर्सिंग अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने इस पहल का समर्थन किया है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ़ लगातार मरीजों की सेवा में जुटे रहते हैं, लेकिन व्यक्तिगत जीवन में वे परिवार से दूर रहने की पीड़ा झेलते हैं। खासकर उन दंपतियों के लिए स्थिति और भी कठिन हो जाती है, जो अलग-अलग राज्यों या शहरों में पदस्थ रहते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार स्पाउजर ट्रांसफर पॉलिसी लागू करती है तो इससे न केवल कर्मचारियों का मानसिक बोझ कम होगा बल्कि उनके कार्य प्रदर्शन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। क्योंकि परिवार का साथ मिलने पर तनाव कम होता है और कार्यक्षमता बढ़ती है।
नर्सिंग अधिकारियों ने प्रधानमंत्री से अपेक्षा जताई है कि वे इस पहल को अपनी प्राथमिकता में शामिल करें और ‘एक ऐतिहासिक निर्णय’ लेकर स्वास्थ्यकर्मियों के जीवन को आसान बनाएं। उनका मानना है कि यह कदम मोदी सरकार की ‘परिवार और संस्कारों को जोड़ने वाली छवि’ को और भी मजबूत करेगा।
पत्र के अंत में नर्सिंग ऑफिसर ने लिखा है—
“माननीय प्रधानमंत्री जी, आपकी एक पहल हमारे टूटे हुए परिवारों को जोड़ देगी। हम और भी समर्पण के साथ राष्ट्रसेवा में योगदान देंगे। कृपया हमें यह तोहफ़ा दीजिए। यह नीति आने वाली पीढ़ियों तक आपके नाम को इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज करेगी।”