
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को बिलासपुर के अधिकारियों ने ठेंगा दिखा दिया है। एक ओर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षा व्यवस्था की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में रिश्वत के गंभीर आरोपों वाले एक बाबू को मात्र 42 दिनों में बहाल कर दिया गया है।
अधिकारी का ‘खेल’ और मंत्री पर सवाल….
मस्तूरी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 श्री सी.एस. नौरंगे को चिकित्सा प्रतिपूर्ति भुगतान के लिए पैसे मांगने और ऑडियो वायरल होने के आरोप में निलंबित किया गया था। यह मामला सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और विभागीय छवि को धूमिल करने का था।
लेकिन, विभाग ने जाँच पूरी होने, या आरोपी को दोषमुक्त होने का इंतजार नहीं किया। 22 अक्टूबर 2025 को जारी बहाली आदेश में DEO ने ‘लिपिकों की कमी’ का हास्यास्पद तर्क देकर बाबू को उसी पद पर बहाल कर दिया।
यह आदेश सिर्फ एक बाबू की बहाली नहीं, बल्कि उन लाखों शिक्षकों और ईमानदार कर्मचारियों के आत्मसम्मान पर अधिकारी वर्ग का ‘थप्पड़’ है, जो मंत्री जी के निर्देशों पर पारदर्शिता लाने का प्रयास कर रहे हैं।मुख्यमंत्री की मंशा को पलीता भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में केवल ‘लिपिकों की कमी’ का बहाना बनाकर बहाली करना यह दिखाता है कि जिले के अधिकारियों को सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी मंशा की कोई परवाह नहीं है।
क्या एक भ्रष्ट अधिकारी की बहाली, लिपिक की कमी से ज्यादा जरूरी थी? क्या जिला शिक्षा अधिकारी ने बहाली से पहले अपने उच्च अधिकारियों और मंत्री को इसकी जानकारी दी? जब आरोप पत्र का जवाब ‘संतोषजनक नहीं’ था, तो किस आधार पर उसे सिर्फ एक वेतनवृद्धि रोककर छोड़ दिया गया?
मंत्रीजी दें जवाब…..
प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। यह घटना दर्शाती है कि उनके विभाग के अधिकारी कठोर कार्रवाई के बजाय भ्रष्ट कर्मचारियों को संरक्षण देने में लगे हैं।
यदि सरकार इस आदेश को तत्काल रद्द नहीं करती है, तो यह माना जाएगा कि भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ चुनावी नारा था, जमीनी हकीकत नहीं।


