लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन के 150 दिन पूरे: तपती धूप में हक की लड़ाई, महिलाओं ने दिखाई अद्भुत दृढ़ता

बिलासपुर। बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र में सदियों से बसे गरीब परिवारों के आशियाने पर संकट के बादल अभी भी मंडरा रहे हैं। नगर निगम द्वारा इस क्षेत्र में कॉम्प्लेक्स और गार्डन निर्माण की योजना के विरोध में चल रहा “लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन” आज लगातार 150 दिनों का लंबा सफर तय कर चुका है।
इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बनी हैं यहां की महिलाएं, जो भीषण गर्मी, तपती धूप और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने हक और अपने घर को बचाने के लिए डटी हुई हैं। छोटे-छोटे बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ ये महिलाएं जिस हिम्मत और धैर्य के साथ संघर्ष कर रही हैं, वह वास्तव में नारी सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल बनकर सामने आया है।
प्रदर्शनकारी परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से इस जमीन पर निवास कर रहे हैं और बिना उचित पुनर्वास के उन्हें बेघर करना न्यायसंगत नहीं है। उनका स्पष्ट कहना है कि वे अपने आशियाने की रक्षा के लिए अंतिम निर्णय आने तक संघर्ष जारी रखेंगे।
इसी बीच राहत की बात यह रही कि हाल ही में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रभावित परिवारों को अंतरिम राहत देते हुए मकान तोड़ने की कार्रवाई पर रोक (स्टे) लगा दी है। हालांकि, मामले की अगली सुनवाई अब ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद होगी, जिससे लोगों की निगाहें अब कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन निरंतर जारी रहेगा। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में न्यायालय का निर्णय किसके पक्ष में जाता है—लेकिन फिलहाल लिंगियाडीह की यह लड़ाई संघर्ष, साहस और अधिकार की एक मिसाल बन चुकी है।