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कोटा:माटी नाला में अवैध रेत खनन का खुला खेल: शिकायत के बाद भी कार्रवाई धीमी, कलेक्टर के आदेश तक ही सक्रिय दिखता विभाग

बिलासपुर/कोटा। खोंगसरा से लगभग 2 किमी दूर माटी नाला में अवैध रेत खनन का सिलसिला लगातार जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रोज़ाना कई ट्रैक्टर–ट्रॉली रेत निकालकर ले जाती हैं, लेकिन विभागीय कार्रवाई केवल कागज़ों में दिखती है।


प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अवैध खनन की फोटो और वीडियो खनिज विभाग  को भेजी गईं। जवाब मिला—
आप लोग इन्हें रोककर रखिए, मैं बिलासपुर से निकल रहा  ढाई से तीन घंटे लगेंगे।” इस बीच मौके पर चल रहा खनन जारी रहा और वाहन आसानी से निकल गए।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि माटी नाला में रोज अवैध खनन जारी है,शिकायत के बाद भी वास्तविक कार्रवाई नहीं होती,और विभाग की सक्रियता केवल चुनिंदा मौकों तक सीमित है।


कलेक्टर के आदेश तक ही क्यों जागता है विभाग?

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला कलेक्टर के निर्देश मिलने पर ही खनिज विभाग सक्रिय दिखाई देता है। उसके बाद कुछ गिने–चुने वाहनों पर ही कार्रवाई होती है, जबकि क्षेत्र में खनन का पैमाना उससे कहीं बड़ा है।

लोग सवाल उठा रहे हैं—

“जब कलेक्टर बोलते हैं तभी कार्रवाई क्यों होती है? बाकी दिनों में विभाग कहाँ रहता है?”

खनिज विभाग की ‘उड़न दस्ते’ पर भी सवाल

लोगों ने यह भी कहा कि खनिज विभाग की उड़न दस्ता टीम का काम सिर्फ “खानापूर्ति” जैसा दिखता है। कहा जाता है कि विभाग की टीम आती है, दो–चार गाड़ियाँ रोकती है, कागज़ी कार्रवाई कर वापस चली जाती है— लेकिन माटी नाला में चल रहा अवैध कारोबार जस का तस जारी रहता है।

“न्यायधानी में एक ओर सरकार सुशासन की बात करती है, और दूसरी ओर अवैध खनन बेखौफ जारी है।”


ग्रामीणों की मांग: कलेक्टर करें सीधी कार्रवाई


ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि—माटी नाला क्षेत्र का अचानक निरीक्षण किया जाए।अवैध खनन में शामिल लोगों पर कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई हो

उड़न दस्ता व खनिज विभाग की जवाबदेही तय की जाए

ग्रामीणों का कहना है कि अब मामला सिर्फ खनन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और शासन की विश्वसनीयता ग्रामीणों का कहना है कि अब मामला सिर्फ खनन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और शासन की विश्वसनीयता का भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह लगातार बढ़ रहे रेत माफियाओं से ग्रामीणों को अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता शुरू हो गई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खनिज विभाग को फोटो /वीडियो भेजने के करीब 10 मिनट बाद ट्रैक्टर मालिक भोला (भोलू) अभिषेक केसरवानी मौके पर आ पहुंचा और कहा—

“आप लोगों ने खनिज विभाग के अधिकारीयों को मेरे ट्रैक्टर का फोटो और वीडियो भेज दिये हो ,कॉल आया था कोई बात नहीं है, मेरी उनसे  बात हो गई है ।”

इस बयान ने प्रत्यक्षदर्शियों को और सवालों में डाल दिया कि जो जानकारी सिर्फ विभाग को दी गई थी, वह तुरंत बाहर कैसे पहुँच गई?