“हार से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक: प्रेम, संघर्ष और राजनीति की दिलचस्प कहानी – Himanta Biswa Sarma”

डेस्क न्यूज | खास रिपोर्ट
राजनीति की दुनिया में सफलता की कहानियां अक्सर सुर्खियां बनती हैं, लेकिन Himanta Biswa Sarma की कहानी सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है—यह एक ऐसे प्रेम और संघर्ष की कहानी है, जिसने हर मुश्किल को मात दी।

साल 1996… उम्र महज 27 साल। हिमंत बिस्वा सरमा ने पहली बार विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाई, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। यह हार सिर्फ राजनीतिक नहीं थी, बल्कि उनके निजी जीवन पर भी असर डालने वाली थी। उस समय उनकी प्रेमिका Riniki Bhuyan Sharma (रिंकी भूयाँ) के साथ रिश्ते को लेकर भी सवाल खड़े हो गए।
कहा जाता है कि रिंकी अक्सर हिमंत से पूछती थीं—“माँ पूछेगी कि लड़का क्या करता है, तो मैं क्या जवाब दूं?”
इस पर हिमंत मुस्कुराते हुए कहते—“बोल देना, लड़का मुख्यमंत्री बनेगा।”

लेकिन चुनाव हारने के बाद हालात आसान नहीं थे। समाज और परिवार के दबाव के बीच यह रिश्ता टूट भी सकता था। आखिर कौन अपने बेटी की शादी एक ऐसे युवक से करेगा जो चुनाव हार चुका हो?

फिर आया साल 2001। Indian National Congress ने एक बार फिर हिमंत पर भरोसा जताया और उन्हें टिकट दिया। इस बार उन्होंने न सिर्फ चुनाव जीता, बल्कि अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई भी जीत ली।
जीत के महज एक महीने के भीतर हिमंत और रिंकी ने कोर्ट मैरिज कर ली—और यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा सफर, जो लगातार ऊंचाइयों की ओर बढ़ता गया।
शादी के एक साल के भीतर ही हिमंत बिस्वा सरमा को राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा—मंत्री बने, संगठन में मजबूत पकड़ बनाई और आखिरकार असम के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे।
इस पूरे सफर में उनकी पत्नी Riniki Bhuyan Sharma ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने न सिर्फ परिवार संभाला, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों में भी मजबूती से साथ दिया।
यह कहानी सिर्फ एक नेता की सफलता की नहीं, बल्कि उस विश्वास की है—जो हार के बाद भी टूटता नहीं, बल्कि इतिहास बना देता है।