
बिलासपुर। जिले के कोटा क्षेत्र अंतर्गत अमागोहन के पटवारी अंकित स्वर्णकार को हटाए जाने के मामले ने अब सियासी रंग ले लिया है। कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव की शिकायत पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के खिलाफ भाजपा जिला अध्यक्ष मोहित जायसवाल ने कड़ा विरोध जताया है।
मोहित जायसवाल ने ग्रामीणों के साथ कलेक्टर से मुलाकात कर प्रशासनिक फैसले पर नाराजगी जाहिर की और हटाए गए पटवारी को पुनः पदस्थ करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी जांच के केवल कांग्रेस विधायक की शिकायत पर पटवारी को अटैच करना पूरी तरह अनुचित है।
जायसवाल के मुताबिक, “जिस पटवारी को पहले उसके अच्छे कार्यों के लिए सम्मानित किया गया, उसी को बिना जांच हटा दिया गया। अगर कार्रवाई करनी थी तो पहले निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होती, तो किसी को आपत्ति नहीं होती।”
उन्होंने यह भी कहा कि नए पदस्थ किए गए पटवारी पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, जबकि पूर्व पटवारी अंकित स्वर्णकार सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने का काम कर रहे थे। उनके अनुसार, भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई से नाराज कुछ लोगों ने राजनीतिक दबाव बनाकर शिकायत करवाई, जिसके बाद प्रशासन ने जल्दबाजी में निर्णय ले लिया।
इधर, इस पूरे घटनाक्रम के बाद कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और भाजपा जिला अध्यक्ष मोहित जायसवाल आमने-सामने आ गए हैं। जायसवाल ने तहसीलदार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “तहसीलदार ने पटवारी को बलि का बकरा बना दिया।”
ग्रामीणों में भी इस कार्रवाई को लेकर असंतोष बताया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर ही आगे कोई निर्णय लिया जाए।
फिलहाल, इस मुद्दे ने जिले की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और प्रशासन के सामने भी स्थिति को संतुलित करने की चुनौती खड़ी हो गई है।