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बिलासपुरस्वास्थ्य

•IMA ने स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित लोकसभा प्रत्याशियों को दिए नीतिगत सुझाव •स्टेब्लिकमेंट कास्ट कम कर दी जाय तो स्वास्थ्य सेवाए अपने आप सस्ता हो जायेगा – डॉ.विनोद तिवारी •क्या डॉक्टर के इलाज के दौरान जाने अंजाने में मरीज की मौत और मर्डर जैसी घटना को एक माने जाने चाहिए ?- डॉ.अखिलेश देवरस

बिलासपुर। राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर क्या हो सकता है इसका सुझाव आईएमए ने लोकसभा के सभी बड़े पार्टियों के प्रत्याशियों को अपना मांग पत्र सौपा है।

इस मांग पत्र के संबंध में आज आईएमए के पदाधिकारियों ने बिलासपुर प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी है।

इस मांग पत्र के संबंध में IMA छत्तीसगढ़ के प्रेसिडेंट डॉ.विनोद तिवारी ने जानकारी देते हुए कहा कि हमने लोकसभा प्रत्याशियों को स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में एक मांग पत्र सौंपा है जो मांग पत्र के साथ ही सरकार को एक सुझाव भी है।

डॉ. तिवारी ने कहा की अखिल भारतीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में हम व्यापक रूप से क्या कर सकते है इस संबंध में 65 पेज का एक मेनिफेस्टो लोकसभा सांसद प्रत्याशियों को सौपा गया है। ताकि वे इन सुझाव को नीति के रूप में ला सके। जिसमे प्रमुख रूप से डॉक्टर प्रोटेक्टेशन एक्ट लागू करने के संबंध में है। कोई भी डॉक्टर दबाव में काम न करे। जिसके लिए केंद्र एवम राज्य द्वारा कानून बनाए जाना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आज हर जगह मंहगाई बड़ रही है। डॉक्टरों पर आरोप लगता है की वे मरीजों से ज्यादा फीस ले रहे है। उन्होंने कहा की वर्तमान में हॉस्पिटल स्टेब्लिसमेंट के लिए डॉक्टरों को 28 प्रकार की परमिशन लेने की आवश्यकता पड़ती है ,अगर यह सिंगल विंडो से काम हो तो खर्चे कम लगेंगे, साथ ही 50 बिस्तरों से कम वाली हॉस्पिटल को कुछ रियायते सरकार की ओर से दी जानी चाहिए जैसे उन्हें हॉस्पिटल के लिए जमीन सस्ते में दी जाय,लोन सस्ते में दी जाय, उनकी बिजली का बिल माफ कर दिया जाय। अभी जो सरकार की आयुष्मान सेवाए है उसमे 70% से 75%भागीदारी प्राइवेट सेक्टर की है। अगर सरकार ऐसा करती है तो स्वास्थ्य सेवाए अपने आप सस्ता हो जायेगा।

छत्तीसगढ़ हॉस्पिटल बोर्ड के प्रेसिडेंट डॉ. हेमंत चटर्जी ने कहा की स्टेब्लिसमेंट कास्ट अगर कम कर दिया जाय तो स्वास्थ्य सेवाए सस्ती हो जायेगी। वर्तमान में जो एक्ट बना है उसमे परिवर्तन कर कुछ छूट देनी चाहिए। PCPNDT एक्ट के तहत जो चिकित्सको को अनुचित परेशान किया जाता है, उसे बंद करना चाहिए। इसके नियम में उचित बदलाव की आवश्यकता है ताकि डॉक्टरो को राहत मिल सके। 50 बिस्तरों वाली हॉस्पिटल खोलने में भी हमे कोई रियायत नहीं है। जिससे हॉस्पिटल कॉस्ट बड़ जाता है लेकिन डॉक्टर इलाज में कोई कॉम्पिमिस नही कर सकता।

आईएमए के स्टेट सेकेट्री डॉ. नितिन जुनेजा ने कहा है आज स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित विभिन्न प्रकारों की सेवाओं में GST लगा दी गई है जिसे कम करना चाहिए या खत्म की जानी चाहिए। जिससे आम जनमानस का इलाज सस्ता हो सके।

आईएमए बिलासपुर के सचिव डॉ. प्रशांत दिवेदी ने कहा कि 1000 से 800 डॉक्टरों ने करोना में अपनी ड्यूटी के दौरान जाने गवाई है। कोई भी डॉक्टर आर्थिक रूप से इतना मजबूत नही होता कि घर से बाहर न निकले। आज MBBS Pass आऊट स्टूडेंट से लाइसेंस NEXT परीक्षा ली जा रही है । उस परीक्षा पास करने के बाद ही कोई डॉक्टर प्रेक्टिस के लिए एलिजिबल होगा। यह अनुचित है। 06 साल की MBBS की पढ़ाई करने वालो को सविदा में भर्ती की जा रही है । IAS,IPS की तरह डॉक्टर भी MBBS की पढ़ाई कर डॉक्टर प्रोफेशन को अपना कैरियर की तरह चुनती है। इसे सिर्फ सेवा नही माना जाना चाहिए। आज डॉक्टरो को बस्तर भेज दिया जाता है लेकिन ट्रांसफर व प्रमोशन की कोई पॉलिसी ही नही बनी है। जो बस्तर या नक्सलाइड क्षेत्र में है वे वही अटके पड़े है।

उन्होंने कहा की चिकित्सा सेवा और स्वास्थ्य सेवा में फर्क समझे स्वास्थ्य सेवाए प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है।लेकिन सरकार विगत कई वर्षों से चिकित्सा सेवाएं खरीद रही है। आप इलाज कराने जाते है लेकिन डॉक्टर और हॉस्पिटल सरकार की पसंद की होती है। एक आकड़े के अनुसार PMJY ने खर्च 14 हजार एक हॉस्पिटल में खर्च करती है। जबकि ASS सर्वे के अनुसार 2018 में 36 हजार और 2013 में 45 हजार एवरेज आ रहा है।

जब सोना का भाव 50 हजार है, तो सरकार उसे 25 हजार में बेचने को कह रहा है। यही आज स्वास्थ्य सेवाओं का हो गया है। जिस कारण डॉक्टर और हॉस्पिटल पर लोगो का विश्वास टूट रहा है। हम चाहते है की यह सेवाए एक ट्रस्ट के माध्यम से हो और बीमा कंपनी को हटा दी जाए।

आईएमए बिलासपुर के प्रेसिडेंट डॉ. अखिलेदेवरस ने कहा कि आज PMJAY की 70 % पैसे पिछले 6 माह से पेंडिंग है। जिसके कारण डॉक्टरों को हॉस्पिटल चलाने में व्यवहारिक दिक्कते आ रही है। यही कारण है कि आज मार्केट में टीवी की दवाईयां दिखाई नही दे रही है। उन्होंने यह भी कहा की डॉक्टर के इलाज के दौरान कोई मरीज की मृत्यु हो जाती है तो मर्डर जैसी धाराएं लगा दी जाती है क्या डॉक्टर के इलाज के दौरान जाने अंजाने में मरीज की मौत और मर्डर जैसी घटना को एक माने जाने चाहिए ?