
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस ( सिम्स) में आज “नर्सेस डे” मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी सम्पन्न हुए।

इस कार्यक्रम में सिम्स के डीन डॉ.के.के सहारे एवम डिप्टी एमएस डॉ. विवेक शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में विशेष रूप से उपस्थित रहे। जिन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई। तत्पश्चात नर्सिंग सेवा की जनक फ्लोरेंस नाइटिंगेल को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। आगंतुक अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत- अभिनंदन किया गया।


इस अवसर पर नर्सिंग स्टॉफ के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमो की प्रस्तुति दी गई। आगंतुक अतिथियो ने जिसे देख मंत्रमुग्ध होकर खूब सराहना किया।

इस दौरान सिम्स हॉस्पिटल के डीन डॉक्टर के.के सहारे ने नर्सों को नर्सेस डे की बधाई देते हुए कहा की नर्सों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। इनकी सेवा के बिना कोई हॉस्पिटल चलाने की उम्मीद नही की जा सकती। जहा डॉक्टर मरीजों के चेकअप कर चले जाते है, वही नर्सेस मरीजो के साथ उनके परिवार के सदस्य की तरह रहकर उनका देखभाल करती है।

डॉ.सहारे ने कहा कि कोरोना काल में भी नर्सों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार लोगो की जान बचाने में अपनी जान लगा दी थी। इनकी यही सेवा, त्याग एवम समर्पण के लिए आज का दिन इन्हे समर्पित है।

डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ. विवेक शर्मा ने कहा कि हमारी नर्सेस सिम्स हॉस्पिटल की धड़कन है, हमारी back bone ( रीड की हड्डी) है। जिनके बिना हम डॉक्टर्स कुछ नही कर सकते। ये मरीजों की दिन रात सेवा करती है।

डॉ. शर्मा ने कहा कि कोई भी काम हो चाहे वह मरीजो से संबंधित हो या हॉस्पिटल से संबंधित, नर्सेस के माध्यम से ही हमे मालूम चलता है। आप हमारे साथ है,आपकी मददत से ही हम कुछ बेहतर कर पाते है। आज नर्सेस डे के उपलक्ष्य पर आप सभी का आभार हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रमो में कुर्सी दौड़ ,सिंगिंग, डांस एवम सरप्राईज गेम का कार्यक्रम रखा गया था। आगंतुक अतिथियों एवम मेट्रनो को मेमिन्टम देकर सम्मानित भी किया गया। इस पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन आराधना दास ,नेहा उड़ान एवम राजेश्वरी चंद्राकर द्वारा की गई ।

इस अवसर पर सिम्स हॉस्पिटल के डॉक्टर, मेट्रन संगीता बाला,गायत्री लहीमोर ,आशा मोनिका,दुर्गा कवर एवम बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टॉफ उपस्थित रहे।

० नर्सेस डे क्यों मनाया जाता है ०
नर्सों को सम्मान देने के लिए हर साल 12 मई को विश्व भर में नर्स दिवस (International Nurses Day) मनाया जाता है. आपको बता दें कि 1820 में इसी दिन मॉर्डल नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म हुआ था. दुनिया भर में फ्लोरेंस नाइटिंगेल को लेडी विद दे लैंप के नाम से भी जाना जाता है.क्योंकि वो रात के अंधेरे में लैंप लेकर घायल सैनिकों का इलाज करने के लिए निकलती थीं. युद्ध के दौरान घायल सैनिकों में इन्फेक्शन बढ़ रहा था, जिससे सैनिकों की मौत हो रही थी. उनके इलाज से हजारों की तादाद में सैनिक फिर से ठीक होने लगे थे. अपने इस सराहनीय काम से फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने ‘नर्सिंग’ को महिलाओं के लिए एक नया पेशा बना दिया था।

० कोरोना काल में बड़ा योगदान ०
कोरोना महामारी के दौरान भी हम सभी ने देखा है कि जब दवा काम नहीं कर रही थी, तब सिर्फ सेवा ही काम कर रही थी. उस दौरान नर्सों ने लाखों लोगों की जान बचाई थी. अपनी जान की परवाह किए बगैर मरीजों का इलाज किया था.

० नर्सेस का महत्व ०
किसी सेहत संबंधी समस्या को ठीक करने में डॉक्टर का काम तो महत्वपूर्ण होता ही है लेकिन नर्स के काम को भी कम नहीं आंका जा सकता। नर्स ही होती है जिसके ऊपर मरीज के उपचार की जिम्मेदार होती है। इस वजह से भी यह दिन बहुत महत्व रखता है। कोरोना महामारी के दौरान तो डॉक्टरों के साथ इन्होंने भी दिन-रात मरीज़ों की सेवा की थी बिना आराम किए हुए।