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बिलासपुरशिक्षा

कुलपति ने यूजीसी के निर्णय को किया खारिज, महाविद्यालय ने कहा अनुदान आयोग का निर्णय अंतिम ‘ महाविद्यालय विश्वविद्यालय के इस विरोधाभासी, नियम विरूद्ध और अवैधानिक आदेश को मामने में असमर्थ है : राजकुमार अग्रवाल (अध्यक्ष स्वायत्तता समिति)

बिलासपुर। शहर के प्रतिष्ठित डीपी महाविद्यालय को यूजीसी द्वारा ऑटोनॉमस का दर्जा प्रदान किया गया है, जिसका आदेश हाल ही के दिनो मे जारी किया गया है। लेकिन यूनिवर्सिटी के कुलपति एडीएन बाजपाई के द्वारा डीपी कॉलेज को ऑटोनॉमस का दर्जा प्रदान न करने से महाविद्यालय और कुलपति के बीच जंग जैसी स्थिति निर्मित हो गई है,जिससे महाविद्यालय में पड़ने वाले छात्र छात्राओं दुविधा में पड़ गए है।

इस विषय को लेकर डीपी विप्र महाविद्यालय स्वायत्तता समिति के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने एक प्रेस नोट जारी करते हुए कहा है कि अटल बिहारी वाजपेयी विश्व विद्यालय के कुलपति एडीएन बाजपेई ने नित नये नियम विरूद्ध कार्य कलापों से ख्यात एवं छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत, छात्र, पालक और जन प्रतिनिधियों को धता बताते हुये अपने स्वार्थ और निरंकुश कार्यों में अब एक नया फरमान जारी कर विप्र महाविद्यालय को यूजी सी के निर्णय की अवहेलना कर स्वायत्त महाविद्यालय के अनुसार कार्य न करने को पत्र लिखा है।

श्री अग्रवाल ने कहा है कि एक ओर जहां विश्व विद्यालय के कुलपति अज्ञात कारणों से विश्व विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा नगर के प्रमुख कालेज डी पी विप्र महाविद्यालय को स्वायत्त महाविद्यालय का दर्जा दिये जाने के बावजूद उसकी राह में अवैध और नियम विरूद्ध रुप से रोड़े अटकाने के कारण चर्चा में हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होने एक और नया फरमान जारी कर डी पी विप्र महाविद्यालय को निर्देशित किया है कि वह अनुदान आयोग द्वारा दिये गये स्वायत्त महाविद्यालय के अनुसार कार्यवाही कर विभिन्न समितियां और तैयारियां न करे।

श्री अग्रवाल ने कहा है कि कुलपति ने अपने पत्र में महाविद्यालय को पूर्ववत साधारण रुप से ही प्रवेश, सिलेबस और अन्य कार्य करने का पत्र लिखा है और न करने पर धमकी दी है कि ऐसा न करने पर छात्रों की प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाएगी। जिससे महाविद्यालय अब दुविधा में है कि वह विश्व विद्यालय अनुदान आयोग के आदेश का पालन कर स्वायत्त महाविद्यालय के अनुरूप शिक्षा स्तर को उन्नत करे या विश्व विद्यालय के कुलपति की धमकी में पुराने रूप में ही कार्य करे।

उल्लेखनीय है कि विश्व विद्यालय का आदेश न मानने पर वह कार्यवाही करने की धमकी दे रहा है और उधर अनुदान आयोग के आदेश का पालन न करने पर वह भी अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकता है। दोनों ही स्थितियों में छात्रों और छत्तीसगढ़ की उभरती शिक्षा के स्तर पर बुरा एवं विपरित प्रभाव पड़ना अवश्यंभावी है और उसे खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

श्री अग्रवाल ने कहा है कि सभी विशेषज्ञों का भी एकमत से यह निष्कर्ष है कि अनुदान आयोग का निर्णय अंतिम है और विश्व विद्यालय का अधिसूचित करना मात्र एक औपचारिक प्रक्रिया है जिसका पालन करना न करन विश्व विद्यालय और अनुदान आयोग के बीच का मामला है। अतः महाविद्यालय पर अनुदान आयोग का निर्णय ही प्रभावी होगा अतः महाविद्यालय उनके आदेशों का ही पालन छात्र और शिक्षा हित में करने तत्पर है।

श्री अग्रवाल ने कहा है कि किसी भी नियमावली में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशों की अवहेलना कर कुलपति के निजी आदेशों का पालन करने का नियम हो तो उल्लेख करें। महाविद्यालय विश्वविद्यालय के इस विरोधाभासी, नियम विरूद्ध और अवैधानिक आदेश को मामने में असमर्थ है।