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कोटा

रेलवे ठेकेदारों की मनमानी: 2 एकड़ शासकीय जमीन की अवैध खुदाई, हजारों ट्रक मिट्टी निकाली, पेड़ काटे – विभाग मौन


कोटा। बेलगहना तहसील के खोगसरा गांव में रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ठेकेदार द्वारा करीब 2 एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध खुदाई कर हजारों ट्रक मिट्टी निकाल ली गई। इस दौरान खेतों में लगे कई हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए अवैध उत्खनन पर खनिज विभाग ने मात्र 8.50 लाख रुपये की पेनल्टी लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया, जबकि पेड़ कटाई को लेकर राजस्व विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।


जब इस संबंध में डीएफओ नीरज से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र आंशिक रूप से वन भूमि में नहीं आता है, इसलिए राजस्व विभाग को पत्र भेजा गया है। वहीं बेलगहना के तहसीलदार समर्थ थवाईत से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस मामले की उन्हें अभी कोई जानकारी नहीं है।

जबकि रेलवे स्टेशन के पास मुख्य सड़क किनारे महीनों से खुलेआम अवैध खुदाई और हरे भरे पेड़ों कटाई होती रही।
आज जब सरकार “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, ऐसे समय में  जिम्मेदार अधिकारियों के रहते इस तरह पेड़ों की अंधाधुन कटाई समझ से परे है!


टाटीधार में भी यही कहानी


इसी तरह कोटा क्षेत्र के टाटीधार में अरपा नदी पर बन रहे पुल के एप्रोच रोड के लिए रोड़ ठेकेदार ने भी सड़क निर्माण के लिए रोड़ के किनारे 15–20 फीट गहरी खुदाई कर अवैध मिट्टी की खुदाई कर दी। इस दौरान कई पेड़ों की जड़ें उखाड़ दी गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के अंधेरे में JCB मशीन और हाइवा ट्रकों से नदी किनारे से बड़े पैमाने में रात दिन अवैध रेत निकाली गई, लेकिन विभागों ने सिर्फ नोटिस देकर खानापूर्ति की।

टाटीधार


ग्रामीणों का आरोप


ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में जब भी कोई निर्माण कार्य होता है, तो अवैध मिट्टी उत्खनन और पेड़ कटाई आम बात बन गई है। प्रशासन की निष्क्रियता से ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं।

अब सवाल यह है कि क्या पर्यावरण संरक्षण सिर्फ नारों तक सीमित है? और क्या दोषियों पर कभी सख्त कार्रवाई होगी?